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Sudhakar Singh News: एफआईआर के बाद सांसद सुधाकर सिंह का मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को खुला पत्र, वाटर पार्क परियोजना पर उठाए सवाल

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Alam Ki Khabar: बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने पिपराकोठी वाटर पार्क परियोजना, किसानों की जमीन और अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को खुला पत्र लिखा। उन्होंने प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए।

पटना/आलम की खबर:बिहार की राजनीति में पिपराकोठी वाटर पार्क परियोजना को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस बीच बक्सर से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नाम खुला पत्र जारी कर राज्य सरकार, जिला प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने किसानों की जमीन, परियोजना के निर्माण और अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

सुधाकर सिंह ने अपने खुले पत्र में आरोप लगाया कि पूर्वी चंपारण के पिपराकोठी में लगभग 95 वर्षों से किसानों के कब्जे और जमाबंदी वाली भूमि को बेहद कम समय में रद्द कर दिया गया। उनका दावा है कि 22 जून को भूमि की मापी की गई और अगले ही दिन निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों की खेती वाली जमीन पर वाटर पार्क निर्माण के फैसले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

राजद सांसद ने व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा कि यदि इतनी तेजी से सरकारी प्रक्रियाएं पूरी हो सकती हैं तो संबंधित अधिकारियों को सम्मानित किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कागजों पर भले ही निर्माण कार्य किसी एजेंसी को आवंटित किया गया हो, लेकिन वास्तविक कार्य किसी और के माध्यम से कराया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

गौरतलब है कि 3 जुलाई को पिपराकोठी में प्रस्तावित वाटर पार्क परियोजना के विरोध में सुधाकर सिंह किसानों के साथ प्रदर्शन करने पहुंचे थे। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने ट्रैक्टर से विवादित भूमि की जुताई कर विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद प्रशासन ने आरोप लगाया कि सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई गई, निर्माण कार्य रुकवाया गया और सरकारी भूमि पर कब्जे का प्रयास किया गया। इस मामले में पिपराकोठी थाना कांड संख्या 361/26 दर्ज कर सांसद सुधाकर सिंह समेत 27 नामजद और 30 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया।

अपने पत्र में सुधाकर सिंह ने इस एफआईआर को पूरी तरह फर्जी बताते हुए पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि प्राथमिकी में कई तथ्यात्मक और भाषाई त्रुटियां हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन पर एक व्यक्ति की जेब से 35 हजार रुपये निकालने का आरोप लगाया गया है, जबकि इस संबंध में कोई वीडियो या अन्य ठोस साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी व्यंग्यात्मक टिप्पणी की।

सांसद ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि भविष्य में भी किसानों के हित में आंदोलन करना पड़ा तो वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे किसी भी कानूनी कार्रवाई से पहले तथ्यों और साक्ष्यों का गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा।

दूसरी ओर जिला प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोपों के आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई की गई है। प्रशासन के अनुसार पूरे मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी है और जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस मामले ने बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक ओर राजद सरकार पर किसानों की जमीन से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल उठा रही है, वहीं प्रशासन कानून के तहत कार्रवाई किए जाने की बात कह रहा है। अब सभी की नजर जांच की प्रगति और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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विशेष विश्लेषण

पिपराकोठी वाटर पार्क परियोजना को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ रहा है। राजद सांसद सुधाकर सिंह ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि प्रशासन सभी कार्रवाई को कानून सम्मत बता रहा है। मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया आगे की स्थिति स्पष्ट करेगी।

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